Saturday, June 8, 2019

भारतीय हीलियम


7 जून 2019 को tifr में एक होने वाले एक वार्तालाप (colloquium) में प्रो॰ अर्नब भट्टाचार्य ने आवर्त सारणी के आरम्भ से लेकर पिछले माह तक का विवरण दिया और विभिन्न तरह की आवर्त सारणियाँ बताई। इसका पोस्टर आपको निम्नलिखित टीआईएफआर के इंडिको पृष्ठों में मिल जायेगा। भारतीय जूनियर साइंस ओलंपियाड (Indian Junior Science Olympiad) में दी गयी एक समरूप प्रस्तुति : http://youtu.be/ig32cze3FNQ
उन्होंने विस्तारित रूप से और बहुत ही सरल भाषा में आवर्त सारणी के विकास क्रम को समझाया और विभिन्न जानकारियाँ दी। उसमें उन्होंने विभिन्न समयों और कार्यों का वर्णन अच्छे से किया। कुछ सामान्य बातें निम्नलिखित रहीं:
  • लैंथेनम (Lanthanum), एक्टीनियम (Actinium), लूटिशियम (Lutetium) और लोरेंसियम (Lawrencium) की आवर्त सारणी में स्थिति को लेकर पहले विवाद था। अमेरिका वाले लैंथेनम तथा एक्टीनियम को F-ब्लॉक में और लूटिशियम तथा लोरेंसियम को D-ब्लॉक के अंतिम स्तम्भ में रखते थे जबकि ब्रितानी लैंथेनम तथा एक्टीनियम को डी-ब्लॉक में रखते थे। लेकिन पिछले वर्षों में अंतराष्ट्रीय रूप से इन चारों को ऍफ़-ब्लॉक में रखने पर सहमति बन गयी और वर्त्तमान में ऍफ़-ब्लॉक  में 30 परमाणुओं को रखा जाता है जबकि डी-ब्लॉक में प्रथम स्तम्भ में लैंथेनम और एक्टीनियम के स्थानों को खाली रखा जाता है।
  • आवर्त सारणी में स्थित तत्वों में 2 तत्व ऐसे हैं जिनका नामकरण वैज्ञानिक के ज़िंदा रहते उनके नाम से किया गया। जिनमें से एक नामकरण इसी दशक में किया गया।
  • गेडोलिनियम (Gadolinium) एक ऐसा पदार्थ है जो कमरे के ताप पर अनुचुम्बकीय है लेकिन इसको प्रयोगशाला में बहुत ही आसानी से लौहचुम्बकीय (ferromagnetic) पदार्थ के रूप में काम में लिया जा सकता है क्योंकि इसका क्यूरी ताप 20 डिग्री सेल्सियस के लगभग है। सामान्य ताप पर अन्य लोहचुम्बकीय पदार्थ लोहा, कोबाल्ट और निकल हैं।
इसमें भारत से सम्बंधित कुछ बातें उन्होंने बताई:
  • वैज्ञानिक कार्य : हीलियम की खोज भारत में हुई।
  • मिथ्या वैज्ञानिक कार्य : हाइड्रोजन और हीलियम के मध्य दो अन्य तत्वों को रखा जाता है जिनके नाम क्रमशः आर्डारियम और ओकेटियम। उपरोक्त वीडियो में इसे 35 मिनट के बाद देखा जा सकता है।
हीलियम की खोज भारत के गुंटूर में एक फ़्रांसिसी वैज्ञानिक ने की थी और उसके बाद एक अँगरेज़ वैज्ञानिक ने भी ऐसे ही कणों को देखा और दोनों ने ही इसे नए कण के रूप में नहीं पहचाना। इसके पश्चात् एक जर्मन वैज्ञानिक ने इसे नए कण के रूप में प्राप्त किया।

1 comment:

  1. Audio of the presentation at tifr: http://indico.tifr.res.in/podcast/oggs/7147.ogg

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