अब हम प्लांक के विकिरण नियम का अध्ययन करेंगे। उपरोक्त नियम प्लांक का क्वांटीकरण नियम था। प्लांक के क्वांटिकरण नियम के अनुसार E = 0, ΔE, 2ΔE, 3ΔE, ... जहाँ ΔE ∝ ν है जिसे हम ΔE = hν लिख सकते हैं जहाँ h प्लांक नियतांक है और हम E = nhν लिख सकते हैं। यहाँ n कोई पूर्णांक संख्या है। अब यहाँ से हम प्लांक के क्वांटिकरण को इस सूत्र से दे सकते हैं। प्लांक नियतांक का मान 6.62×10-34 जूल-सैकण्ड होती है। यह एक सार्वत्रिक नियतांक है जिसका एसआई मात्रक जूल-सैकण्ड है। अब इसके आधार पर प्लांक ने E = nhν से अप्रगामी तरंगों के लिए एक तरंग की कुल औसत ऊर्जा ज्ञात की जिसका सूत्र Eav = hν/(exp(hν/kT) - 1 ) प्राप्त किया। यह दूसरी उत्पत्ति है जो हमने आपके लिए छोड़ी है। यह आप किसी भी स्नातक स्तर की पाठ्य पुस्तक में पा सकते हैं। यह एक बहुत ही सुन्दर व्यंजक है और आपको इसे हल करना चाहिए। चूँकि यहाँ E के मान किसी दोलित्र के लिए hν है, किसी के लिए 2hν तो किसी के लिए 3hν और किसी के लिए nhν है। इन सभी का औसत मान उपरोक्त सूत्र में लिखे अनुसार प्राप्त होता है। अतः औसत ऊर्जा के सूत्र से इसे ज्ञात किया जा सकता है। अब हम इस ऊर्जा सूत्र को रेले जीन्स के नियम में रखकर देखते हैं। अब तक हमने प्लांक का क्वांटिकरण नियम देखा। अब हम प्लांक के विकिरण नियम का अध्ययन करते हैं जिसे अंग्रेज़ी में प्लाक्ज़ रेडियेशन लॉ कहते हैं। पुनः हम गुहा में ऊर्जा घनत्व को गुहा में अप्रगामी तरंगों के घनत्व और एक अप्रगामी तरंग की कुल औसत ऊर्जा के गुणनफल के रूप में लिखते हैं तो हमें सूत्र uν = (8πν2/c3)(hν/(exp(hν/kT)-1) लिख सकते हैं जिसमें प्रथम पद रेले जीन्स नियम से सीधा उधार लिया है लेकिन यहाँ दूसरे पद में रेले जीन्स की ऊर्जा kT के स्थान पर प्लांक क्वांटिकरण नियम से ली गयी है। अतः परिणामी सूत्र हमें uν = (8πhν3/[c3(exp(hν/kT)-1))] प्राप्त होता है। आप इस सूत्र को तरंगदैर्घ्य के रूप में परिवर्तित कर सकते हैं। यह आपके लिए गृह कार्य है, आप इसे तरंगदैर्घ्य के रूप में परिवर्तित कर सकते हैं जिसमें आवृत्ति के पदों में प्लांक के विकिरण नियम को तरंगदैर्घ्य के पदों में प्राप्त कर सकते हैं जिसके लिए आपको तरंगदैर्घ्य और आवृत्ति में सम्बन्ध को याद रखना पड़ेगा। अब यहाँ देखा जा सकता है कि यह नियम आश्चर्यजनक रूप से एक ऐसा सैद्धान्तिक नियम है जो कृष्णिका विकिरण के पूर्ण प्रायोगिक वर्णक्रम को समझाने में सफल रहता है। इसके लिए आप निम्नलिखित ग्राफ़ देख सकते हैं:
यहाँ उपरोक्त चित्र में प्लांक विकिरण नियम और प्रायोगिक वर्णक्रम एक दूसरे को पूर्णतः अतिव्यापी करते हैं। यह नियम वीन के नियम और रेले-जीन्स के नियम की तरह उच्च आवृत्ति अथवा निम्न आवृत्ति को समझाने वाले नहीं है बल्कि यह पूर्ण वर्णक्रम को पूर्णतः समझाने में सफल रहा। प्लांक के इस नियम की सफलता के साथ ही इसने भौतिकी में क्वांटम यांत्रिकी के रूप में नया पथ प्रदर्शित करने किया और न्यूनतम ऊर्जा के टुकड़ों के रूप में ऊर्जा के क्वांटा से ही हमें ज्ञात हुआ कि ऊर्जा का स्थानान्तरण सतत न होकर विविक्त होता है जैसा हमने दोलित्र से विद्युत्चुम्बकीय तरंग में स्थानान्तरण के रूप में देखा। प्लांक का यह कार्य इतना अधिक महत्त्वपूर्ण था कि मैक्स प्लांक को 1918 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मैक्स प्लांक जर्मनी से थे अतः जर्मनी में प्लांक के नाम पर एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण शोध संस्थान है जिसका नाम प्लांक रिसर्च सोसाइटी है। प्लांक इस नये सिद्धान्त के प्रथम अन्वेषक हैं। वो इस सिद्धान्त के पितामह भी कहे जा सकते हैं।
अब आगे हम कुछ और चर्चा करते हैं जो आपके गृह कार्य से सम्बंधित है। हम प्लांक विकिरण नियम की चर्चा करते हैं।
- प्लांक के विकिरण नियम की सहायता से निम्न तरंगदैर्घ्य क्षेत्र में वीन के नियम को व्युत्पन्न कीजिए। यह कार्य उपर किया जा चुका है जिसमें कहा गया था कि औसत ऊर्जा निम्न ऊर्जा क्षेत्र में kT और उच्च ऊर्जा क्षेत्र में शून्य होनी चाहिए।
- प्लांक के विकिरण नियम की सहायता से उच्च तरंगदैर्घ्य क्षेत्र में रेले-जीन्स नियम को व्युत्पन्न कीजिए।
ये दो प्रश्न आपके गृह कार्य में हैं इससे पहले हमने आपको दो सूत्र व्युत्पन्न करने के लिए दिये हैं जिसमें अप्रगामी तरंगों के लिए ऊर्जा घनत्व का मान ज्ञात करना और प्लांक दोलित्र के लिए औसत ऊर्जा ज्ञात करना शामिल है। इसप्रकार आपके लिए चार प्रश्न गृह कार्य के रूप में छोड़े हैं।
उपरोक्त विषय की वीडियो के रूप में व्याख्या के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें:


