Tuesday, August 25, 2020

क्वांटक यांत्रिकी: चिरसम्मत भौतिकी का एक परिचय

क्वांटम यांत्रिकी आज चिकित्सा से लेकर अभियांत्रिकी के सभी विषयों में प्रयुक्त होती है। हमें क्वांटम यांत्रिकी को समझने से पहले यह समझना चाहिए कि हमें इसकी जरूरत क्यों पड़ी और उसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि हम चिरसम्मत यांत्रिकी को समझें। अतः यह ब्लॉग चिरसम्मत यांत्रिकी के बारे में चर्चा के लिए लिखा गया है।

चिरसम्मत भौतिकी को हम तीन भागों में विभक्त करते हैं: 

  1. चिरसम्मत यांत्रिकी,
  2. चिरसम्मत विद्युत्गतिकी और
  3. उष्मागतिकी
सबसे पहले हम इसके सभी नियमों को समझने का प्रयास करते हैं:

  1. चिरसम्मत यांत्रिकी की शुरूआत हम न्यूटन की गति के नियमों से आरम्भ करते हैं जिसमें बाद में लाग्रांजियन और हैमल्टोनियन को शामिल कर लेते हैं जो हमें ज्यादा अच्छे से सूत्रित करके समस्याओं को हल करने में सहायता प्रदान करते हैं। इसमें हम कण अथवा वस्तु की गति, दृढ़ पिंड, बल, बलाघूण, जड़त्व के नियम आदि का अध्यन करते हैं। 
  2. विद्युत्गतिकी को हम मैक्सवेल समीकरणों से उल्लिखित करते हैं। मूलतः हम चार मैक्सवेल समीकरणों का अध्ययन करते हैं जो हमें कणों की गति, विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्र और उनकी अन्योन्य क्रियायें और इन क्षेत्रों का दिक्-काल में परिवर्तन।
  3. उष्मागतिकीय नियम और मैक्सवेल वोल्ट्समान सांख्यिकी इसको समझाने के लिए काम में लिए जाते हैं। इसमें हम उष्मा, कार्य और किसी निकाय के औसत व्यवहार का अध्ययन करते हैं। यहाँ निकाय को हम कणों के समाहार के रूप में देखते हैं।
चिरसम्मत भौतिकी एक निश्चियात्मक सिद्धान्त है जबकि क्वांटम यांत्रिकी एक प्रायिकता आधारित सिद्धान्त है। हम इस वाक्य को सरल शब्दों में एक उदाहारण देकर समझा सकते हैं। जैसे हम एक कण को समझने का प्रयास करते हैं जिसकी प्रारम्भिक अवस्थायें हमें ज्ञात हैं जिनमें कण का द्रव्यमान, उसकी प्रारम्भिक अवस्था r = r0, प्रारम्भिक वेग v = u और इस कण पर कार्य करने वाले बल F = F0 शामिल हैं। अर्थात हमें कण की सभी प्रारम्भिक अवस्थाओं का ज्ञान है। अतः हम न्यूटन की गति के नियम अथवा लाग्रांजियन अथवा हैमल्टोनियन की सहायता से इस कण के भविष्य को सुपरिषित कर सकते हैं और इसकी भविष्य में स्थिति को यथार्थता के साथ बताना सम्भव है जिसे गणितीय रूप में कण का बिन्दुपथ कहते हैं। अतः चिरसम्मत यांत्रिकी में हमें यदि प्रारम्भिक अवस्थायें ज्ञात हों तो हम भविष्य को जान सकते हैं। चिरसम्मत यांत्रिकी के अनुसार कण और तरंग दो एकदम अलग रूप में मानती है अर्थात् कोई कण कभी तरंग नहीं हो सकता और कोई तरंग कभी कण नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए हम इन्हें दो ऐसे समुच्चय मान सकते हैं जिनके अन्तर्वेशित अथवा प्रतिच्छेदन समुच्चय के रूप में केवल खाली समुच्चय दिया जा सकता है। हम कण और तरंगों में कुछ अन्तर को समझने का प्रयास करते हैं:
  1. कण के पास द्रव्यमान, ऊर्जा और संवेग होता है जबकि तरंग के पास केवल ऊर्जा और संवेग होता है।
  2. कण केवल टक्कर कर सकते हैं लेकिन तरंगे व्यतिकरण, विवर्तन, परावर्तन अथवा अपवर्तन कर सकती हैं।
अर्थात कण कभी व्यतिकरण की घटना नहीं दिखायेंगे वैसे ही तरंगों के मध्य टक्कर नहीं होंगी। इस तरह से जो घटनायें कण और तरंग के लिए हैं वो अलग अलग हैं।

उपरोक्त विषय को दृश्य प्रभावों और प्रभावी रूप में समझने के लिए कृपया निम्नलिखित वीडियो देखें: https://youtu.be/tun5TKXSe0M


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