Sunday, December 10, 2023

अभाज्य संख्या p का वर्गमूल

अभाज्य संख्या (prime number) p का वर्गमूल (square root) अपरिमेय संख्या (irrational number) होती है। इसे तार्किक आधार पर सिद्ध कैसे करें?

इसे सिद्ध करने के लिए विरोध उपपत्ति अथवा अन्तर्विरोधज-प्रमाण (proof by contradiction) काम में लेते हैं। इसमें पहले यह मान लिया जाता है कि दिया गया वाक्य सत्य है और उसके आधार पर कुछ गणनाओं अथवा तथ्यों की जाँच की जाती है। हम पाते हैं कि वो विरोधाभाषी मिलती हैं जिससे स्पष्ट होता है कि हमने जो माना था वो असत्य था। यहाँ उपरोक्त उपपत्ति के लिए हम मान लेते हैं कि p एक परिमेय संख्या (rational number) है। इस स्थिति में

जहाँ a और b पूर्णांक संख्यायें (integers) हैं और b शून्यतर (non-zero) है। अंश (nominator) और हर (denominator) का पूर्णांक होना एवं हर का शून्यतर होना एक परिमेय संख्या की आवश्यक शर्त होती है। उपरोक्त समीकरण (equation) को शून्यतर संख्या b से गुणा करने पर

समीकरण को दोनों तरफ वर्ग (square) करने पर

a (अथवा b) के अभाज्य गुणनखण्ड (factorization) में प्रत्येक अभाज्य गुणक (prime factor), a2 (अथवा b2) के अभाज्य गुणनखण्डों में सम संख्या (even number) में होने चाहिए। उपरोक्त संख्या में बायीं तरफ b2 के सम संख्या में गुणक और एक अभाज्य संख्या p होने के कारण कुल अभाज्य गुणकों की संख्या विषम (odd) हो गयी। ठीक इसी तरह दायीं तरफ a2 के अभाज्य गुणकों की संख्या सम है। चूँकि दोनों तरफ संख्या समान होने की स्थिति में उपरोक्त कथन विरोधाभाषी है।

इसका अर्थ है कि हमने जो माना था वो असत्य था। अर्थात् अभाज्य संख्या p का वर्गमूल अपरिमेय होता है।

इसी तरह उन अपूर्ण वर्ग संख्या k के लिए भी सिद्ध किया जा सकता है कि k का वर्गमूल () अपरिमेय होता है। अपूर्ण वर्ग संख्या (not a perfect square) वो संख्या होती है जो किसी पूर्णांक का वर्ग नहीं होता।

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