चंद्रयान 2, उस अभियान का नाम है जो चन्द्रमा पर वर्ष 2019 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा चन्द्रमा की सतह का अध्य्यन करने के लिए चलाया गया प्रयोग है। इसके लिए इसरो ने आजतक का सबसे कम खर्चे वाला एक यान चन्द्रमा पर भेजा। इसमें अच्छी गुणवत्ता के कैमरे लगे हुए हैं जो चन्द्रमा की सतह की अच्छी गुणवत्ता के चित्र भेज रहा है। यह अभियान कई वर्षों पहले आरम्भ किया था। इसमें यान निर्मित करने में कई वर्षों का समय लगा क्योंकि जब इस तरह से कोई यान अंतरिक्ष में भेजा जाता है तो उसके प्रत्येक सेकण्ड का पूर्वानुमान (गणितीय गणना के साथ) लगाना जरुरी है। इस यान को 22 जुलाई 2019 को पृथ्वी से भेजा गया। इस चंद्रयान में तीन भाग थे जिनके बारे में मैं यहाँ लिखता हूँ:
- ऑर्बिटर (Orbiter): यह चंद्रयान के चारो तरफ लगाने वाला भाग है जो अगस्त माह में चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित हो गया। इसने विभिन्न बदलाव करते हुए लगभग 124 किमी से 164 किमी दूरी कक्षा में स्थापित हो गया। यह अगले दो वर्ष तक काम करेगा और चन्द्रमा की उच्च गुणवत्ता के चित्र हमें भेजता रहेगा। इन चित्रों का इसरो के वैज्ञानिक अध्ययन करके ज्ञात करेंगे की चन्द्रमा की सतह पर कौनसे कण पाए जाते हैं।
- लैंडर (Lander): यह चंद्रयान का एक भाग था जो चन्द्रमा की सतह पर उतरने वाला था। यह 2 सितम्बर 2019 को चंद्रयान से अलग हुआ और कुछ दिनों तक चन्द्रमा के ऊपर 35 किमी ऊँचाई पर परिक्रमण करने लगा। इसके बाद 7 सितम्बर 2019 को इसे बड़े आराम से चन्द्रमा की सतह पर उतरना था। लेकिन अज्ञात कारणों से इसका सम्पर्क टूट गया। अब हमें इसकी स्थिति ज्ञात नहीं है। विभिन्न पत्रकार अपने अनुमान लगा रहे हैं लेकिन इसरो के अनुसार इससे संपर्क नहीं हो पा रहा है और हमें इसकी जानकारी नहीं है। यह चन्द्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसके अंदर स्थित रोवर को बाहर निकलने का स्थान देता। इसके अतिरिक्त यह रोवर का संपर्क पृथ्वी (इसरो के वैज्ञानिकों) से बनाकर रखता। इसके अतिरिक्त यह भी कुछ अच्छी गुणवत्ता के चित्र भेजता। इसका नाम विक्रम रखा गया था।
- रोवर (Rover): यह 7 सितम्बर 2019 को लैंडर से अलग होने वाला भाग था। चूँकि हम लैंडर से संपर्क खो चुके हैं अतः हमें वर्तमान में इसकी स्थिति का कोई ज्ञान नहीं है। इसका कार्य चन्द्रमा की सतह पर घूमकर उसकी उच्च गुणवत्ता की तसवीरें भेजना था। इसका नाम प्रज्ञान रखा गया था।
चूँकि अब हमें रोवर और लैंडर द्वारा लिए जाने वाले कम दुरी से अच्छी गुणवत्ता के चित्र नहीं मिल पायेंगे लेकिन अभी ऑर्बिटर से मिल रहे चित्र मिल रहे हैं। अतः अभी भी इस अभियान में बहुत कुछ अध्ययन किया जायेगा लेकिन जो अनुमानित था उस तक नहीं पहुँच पाए। चूँकि प्रज्ञान और विक्रम 14 दिन (पृथ्वी के) तक काम करने वाले थे उसके बाद उस स्थान पर जहाँ इनको उतरना था वहाँ सूर्य की रोशनी कम हो जायेगी अतः ये चित्र हमें नहीं मिल पायेंगे। हालाँकि ऑर्बिटर ठीक काम कर रहा है और अगले 2 वर्ष तक इसके काम करने की संभावना है।

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