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| सन् 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता: जेफ्री हिंटन (बायें) और जॉन हॉपफील्ड (दायें) |
आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क के साथ मशीन लर्निंग को लागू करने के अन्वेषण के लिए सन् 2024 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया। यदि आपको प्रोग्रामिंग भाषायें नहीं आती हैं या आप ये सीख रहे हैं तो आपको लगेगा कि ये तो कंप्यूटर विज्ञान के विषय होंगे। लेकिन ये भौतिकी मेंशोध कार्य में काम आने वाले बहुत बड़े उपकरण हैं। आज से लगभग 2 वर्ष पहले रसायन विज्ञान के एक भारतीय युवा वैज्ञानिक ने मुझे बताया था कि पहले प्रोटीन संरचना की खोज करना बहुत मुश्किल था लेकिन अब यह आसान हो गया है क्योंकि मशीन लर्निंग की सहायता से इनके संरचनायें बड़ी मात्रा में पहले से ही बता दी गयी हैं। अब हमें केवल प्रयोग करके उसकी पुष्टि करनी होती है। हम यहाँ इस विषय पर थोड़ी सी चर्चा करेंगे और बाद में भारत में नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने पर भी कुछ बातचीत करेंगे। यदि आपको इसपर विस्तृत चर्चा चाहिए तो कृपया निर्देशक को लिखें जिससे एक यूट्यूब वीडियो उपलब्ध करवा दिया जायेगा।
मशीन लर्निंग को हिन्दी में यंत्र शिक्षण या स्वचालित शिक्षण भी कहते हैं। यह आर्टिफिशिलय इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धि) का एक प्रकार है। इसमें मशीन ही स्वयं से निर्णय लेती है। सरलतम रूप में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कार बनाने वाली कंपनी में जो रोबोट काम करते हैं, वो सामने किसी व्यक्ति को देखकर रुक जाते हैं। अन्य रूप में आप यह समझ सकते हो कि कुछ कारों को पीछे लेकर जाते समय उनका कैमरा पीछे की दीवार को देखता है और लगभग एक मीटर दूरी पर जोर से आवाज करने लगता है। आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क को हिन्दी में कृत्रिम तंत्रिका तंत्र भी कह सकते हैं। यह गणितीय मॉडल है जो जविक तंत्रिका तंत्र की संरचना एवं कार्यविधि का अनुसरण करता है। अर्थात् जैसे इंसानों में बच्चा जैसे सीखता है और आगे कार्य करता है, वैसे ही यहाँ होता है।
भारतीयों को भौतिकी में नोबेल पुरस्कार कभी नहीं मिली। चंद्रशेखर वेंकटरमन को जाब यह पुरस्कार मिला तब हम ब्रिटिश अधिपत्य में थे और स्वतंत्र भारत में केवल उन लोगों को मिला है जो भारत छोड़कर अन्य किसी देश में चले गये हैं। इसके कारणों में शोध कार्य के प्रति भारतीयों की कम रूचि और सरकारों द्वारा कम प्रचार-प्रसार शामिल है। इसके अतिरिक्त भारत की गरीबी और शिक्षा का अभाव भी इसका एक मुख्य कारण है। हर व्यक्ति पहले एक सुरक्षित जीवन चाहता है जो सामान्यतः सरकारी नौकरी में दिखाई देता है लेकिन यदि कोई रुचि से शोध कार्य करना चाहे तो उसे विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहले संशाधनों की कमी होती है, दूसरा अनुसंधान की कम जानकारी है। हमारे यहाँ माता-पिता केवल पैसे के लेनदेन के बारे में अपने बच्चों को सिखाते हैं लेकिन वैज्ञानिक रुचि पैदा नहीं करते।
